अब बड़ों को भी दी जाएगीटीबी प्रीवेंटिव थेरेपी

 अब बड़ों को भी दी जाएगीटीबी प्रीवेंटिव थेरेपी

दी न्यूज एशिया समाचार सेवा

टीबी मुक्त भारत अभियान :

 अब बड़ों को भी दी जाएगीटीबी प्रीवेंटिव थेरेपी

- अब तक क्षय रोगी के परिवार में पांच वर्ष तक के बच्चों को दी जाती थी प्रीवेंटिव दवा

- पल्मोनरी टीबी के रोगी के सभी परिजनों के दवा खाने से रुकेगा संक्रमण का प्रसार

  मेरठ। टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। एक ओर जहां ओपीडी में आने वाले रोगियों में से पांच प्रतिशत को टीबी जांच के लिए रेफर करना जरूरी है वहीं टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब पल्मोनरी (फेफड़ों की) टीबी रोगी के सभी परिजनों को टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) एक मार्च यानी कल से  दी जाएगी, क्योंकि पल्मोनरी टीबी संक्रामक रोग है, जो सांस के जरिए फैलता है। बता दें कि अब तक क्षय रोगी के परिवार में केवल पांच वर्ष तक के बच्चों को ही टीबी प्रीवेंटिव (रोकथाम) दवाएं दी जाती थीं। ऐसा इसलिए किया जाता था क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और कोई भी संक्रमण उन्हें लगने का खतरा ज्यादा होता है। 

 जिला क्षय रोग अधिकारी डा. गुलशन राय  ने बताया - 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य भारत सरकार की ओर से निर्धारित किया गया है। जाहिर तौर पर यह लक्ष्य हासिल करने के लिए तमाम प्रयास करने होंगे। इसी कड़ी में अब पल्मोनरी टीबी रोगी के सभी परिजनों को टीपीटी देनी शुरू की गई है ताकि रोगी से उसके संपर्क में रहने वालों को संक्रमण लगने का खतरा कम हो सके। टीबी संक्रमण के प्रसार पर रोक लगाकर ही टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसीलिए पल्मोनरी टीबी के रोगियों को सलाह दी जाती है कि सार्वजनिक स्थान पर जाते समय मास्क का प्रयोग करें।

डीटीओ ने बताया कि टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, लेकिन केवल फेफड़ों की टीबी ही संक्रामक होती है। पल्मोनरी टीबी का रोगी  अमूमन उपचार शुरू न होने पर 12 से 15 व्यक्तियों को संक्रमित कर देता है, लेकिन रोगी की जल्दी पहचान और उपचार के साथ ही मास्क का प्रयोग कर इस संख्या को कम कर सकते हैं। रोगी के संपर्क में रहने वाले सभी व्यक्तियों को प्रीवेंटिव दवा दिए जाने से भी इस संख्या पर प्रभावी अंकुश लगेगा। टीबी का एक भी लक्षण नजर आने पर टीबी की जांच कराएं और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर नियमित और पूरा उपचार लें। दवा शुरू करने के दो माह बाद रोगी के संपर्क में आने वालों को संक्रमण लगने का खतरा नहीं रहता। 

सीएमओ ने बताया - दो सप्ताह से अधिक खांसी या बुखार, खांसी के साथ बलगम या खून आना, वजन कम होना, थकान रहना, सीने में दर्द रहना और रात में सोते समय पसीना आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। जिस परिवार में कोई क्षय रोगी हो उस परिवार के सभी सदस्यों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। टीबी की जांच और उपचार की सुविधा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।

 उन्होंने बताया कि जनवरी से लेकर अब तक 2173टीबी मरीज मिल चुके है। जब कि गत वर्ष 16206 टीबी के मरीज मिले थे। जिसमें 5500 प्राइवेट अस्पतालो के मरीज थे। अन्य सरकारी अस्पतालों में मिले मरीज थे। सभी का उपचार पूरी तरह निशुल्क किया जा रहा है। 

 उन्होंने बताया आगामी एक मार्च से प्रीवेटिंग थेरपी अब बडों को दी जाएगी। इसके लिए आईसीनीमा जेड 300 गोली का छ माह तक सुबह शाम मरीज को कराना होगा।