लीवर प्रत्यारोपण कर बचाई मेरठ के मरीज की जान

लीवर प्रत्यारोपण कर बचाई मेरठ के मरीज की जान

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

लीवर प्रत्यारोपण कर बचाई मेरठ के मरीज की जान

-एकलौते पुत्र ने पिता को दान किया यकृत, पिता-पुत्र दोनों स्वस्थ्य

मेरठ। शास्त्री नगर निवासी अवधेश शर्मा को शराब पीने का शौक था। 45 साल की उम्र तक आते-आते उनका यकृत खराब हो गया। कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन आराम नहीं मिला। फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल की डाक्टर जया अग्रवाल को दिखाया, जिन्होंने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। दर्जनभर डॉक्टरों के पैनल ने लीवर प्रत्यारोपण ऑप्रेशन किया, आज अवधेश शर्मा बिल्कुल ठीक है, स्वास्थ्य है।  

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की ओपीडी माह में दो बार (शुक्रवार) गढ़ रोड स्थित तिरुपति लीवर एंड गेस्ट्रो केयर सेंटर पर होती है। विशेष बातचीत के दौरान अमृता अस्पताल में सहायक प्रोफेसर डा. जया अग्रवाल ने बताया, खान-पान और जीवनशैली के कारण लीवर की बीमारियां बढ़ रही है। आम तौर पर लिवर खराब होने का सबसे बड़ा कारण शराब पीना है। फिर जरूरत से ज्यादा वजन, डायबिटीज, हेपाटाइटिस बी और सी से भी लिवर खराब होता है। डॉ. जया अग्रवाल कहती हैं कि लाइफ स्टाइल और दूसरे कारणों से लगभग 50 फीसदी लोगों के लिवर खराब होने की संभावना बनी रहती हैं। अगर लीवर खराब हो जाए तो नजर अंदाज न करें। लक्ष्णों के बारे में बताया, अगर अक्सर उल्टी होती है या जी-मचलाता है, यह लिवर खराब होने या लिवर की बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा खून की उल्टी या मल के साथ खून आए तो यह लिवर डैमेज होने का लक्षण हो सकता है।

ऑप्रेशन में लगा 8-10 घंटे का समय

डा. जया अग्रवाल ने बताया, मेरठ के शास्त्री नगर निवासी अवधेश शर्मा का लीवर खराब हो गया था, उनको ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई। जिसके लिए वे तैयार हो गए। सर्जरी में 8-10 घंटे का समय लगा, जिसमें उनके सीनियर डा. सुधीर सहित डा. दिनेश, डा. उन्नीदरन, डा. विनोद, डा. कृष्णा, डा. श्वेता आदि शामिल थे।

पुत्र ने पिता को दिया लीवर

डा. जया ने बताया, अवधेश के 21 वर्षीय एकलौते पुत्र उत्कर्ष शर्मा ने अपना लीवर पिता को दान किया। यह जटिल प्रक्रिया थी, उत्कर्ष शर्मा थोड़े परेशान थे, लेकिन अब स्वास्थ्य है। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आया। अवधेश ने बताया, अमृता अस्पताल में उन्हें परिवार जैसा माहौल मिला।