मेरठ कचहरी में रविन्द्र भूरा हत्याकांड के आरोपी बरी। जानने के लिए खबर पुरी पढ़े।

मेरठ कचहरी में रविन्द्र भूरा हत्याकांड के आरोपी बरी। जानने के लिए खबर पुरी पढ़े।

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

मेरठ कचहरी में दिन दहाड़े पुलिस कस्टडी में

हुई थी रविंदर भूरा की हत्या।

मेरठ कचेरी न्यूज़।

मेरठ कोर्ट में हुई थी गैंगवार

16 अक्टूबर 2006 मेरठ की कचहरी में गैंगवार देखने को मिली थीं।फिल्मी अंदाज में हुई गैंगवार ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था।उत्तर प्रदेश के नामी कुख्यात रविंद्र सिंह भूरा और उसके भतीजे की कचहरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई । इसके अलावा पुलिस की गोली से बदमाश भी मारा गया था। यूपी पुलिस का एक जवान भी इसमें मारा गया था। इस गैंगवार में कचहरी में आए 7 लोग भी घायल हुए थे।

दिनांक 16-10-2006,प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार और जिले का कप्तान नवनीत सिकेरा, वह घटना जिसने पूरे जिले में दहशत फैला दी, लोग अपनी तारीखो पर भी जाने में अपने मुकदमो की पैरवी करने में भी ड़रने लगे । बड़े बड़े बदमाश जेल से वकीलों से अरजि़या लगावाने लगे,सुरक्षा भले ही न मिले लेकिन कचेहरी न जाना पड़े,  जेल से ही विडियो कॉनफरेंस के ज़रिए तारीख कराई जाये । वजह थी जिला न्यायालय मेरठ में कुख्यात बदमाश  रविंदर उर्फ भूरा का पुलिस कस्टडी में मर्डर।
आइये बताते हैं 2006 कि एक ऐसी घटना के बारे में जिसने  प्रेदश के लॉ एंड ऑर्डर पर सवालिया निशान लगा दिया था । 16/10/2006 जिला जेल मेरठ से अभियुक्त रविन्द्र उर्फ भूरा को लेकर तथा पुलिस सुरक्षा घेरे में लेकर  उपरोक्त वाहन में लेकर कचहरी मेरठ स्थित तेरह न्यायालय भवन के सामने दिन में करीब एक बजे पुलिस की वेन आकर रुकती है आगे  बैठे हैं वादी मुकदमा रोशन बाकी पुलिस बल पीछे गाडी  में बैठा हैं। पुलिस वैन रुकने के बाद वेन का ड्राईवर उतर कर वेन के पीछे आता हैं और  खिड़की खोलकर पुलिस बल के साथ घेरे में लेते हुवे अभियुक्त रविन्द्र उर्फ भूरा को उतारने लगता हैं।सबसे पहले पुलिस लाइन के पुलिस बल ने उतरकर  सुरक्षा घेरा बनाया उसके बाद रविन्द्र उर्फ़ भूरा गाडी से नीचे उतरा और उसको सुरक्षा घेरे में लेते हुवे पी ए सी के जवान उतर रहे थे तभी अचानक पास के एक होटल से एक व्यक्ति सुरक्षा घेरे के पास आया और उसने अपने हाथ मे लिए हुए पिस्टल से रविन्द्र उर्फ़ भूरा पर फायर किया जाता है जिससे वह घायल हो कर निचे गिर पड़ता हैं  फायार होते ही सुरक्षा में लगे कांस्टेबल मनोज कुमार ने उस व्यक्ति की कोली भर कर दबोच लिया जिसने फायर किया था , तब तक तीन चार अन्य बदमाशों द्वारा चारो तरफ से अधाधुंद फायर किये जातर हैं बदमाशों ने बेखौफ होकर रविंद्र भूरा पर फायरिंग की । रविन्द्र भूरा के परिवारजन जिनमें उसके भतीजे गौरव,प्रशांत‌ व विनय तथा उसके साले सोहनवीर ने भी बदमाशों की तरफ फायर किये, कॉन्स्टेबल मनोज कुमार ने अदम सहास का परिचय देते हुए हमलावर बदमाश को दबोच कर रखा अपने आप को कॉन्स्टेबल की पकड से छूड़ाने के लिये बदमाश ने मनोज कुमार पर अपने पिस्टल से फायर किया  जो मनोज कुमार को लगा जिससे घायल होकर उसकी पकड़ ढीली हो गयी और उक्त बदमाश  छूटकर उन लोगो पर फायर करते हुए भागने लगा गिरते गिरते घायल होने के बावाजुद भी मनोज कुमार ने अपनी एस अल आर से फायर किया तथा बाकी पुलिस बल  ने भी अपनी आत्मरक्षार्थ व रविन्द्र भूरा की रक्षा हेतु अपने अपने सरकारी अस्लाहो से फायर किये जिससे उक्ल बदमाश तेरह-न्यायालय भवन के पश्चिमी गेट के पास गिर गया। इस दौरान अन्य बदमाशों व रविन्द्र भूरा के परिजनों के द्वारा फायरिंग होती रही जिसमें का० बलजीत सिंह व रामवीर सिंह व वीरेन्द्र पाल भी घायल हो गये ।  करीब दस मिनट तक फायरिंग हुई। इस दौरान कचहरी परिसर में भग दड़ मच गई। अपनी तारीख़ों व अन्य काम से आये वादकारियों तथा वकील व अन्य आसपास के दुकानदारों व न्यायालय कर्मियों ने भागकर,छिपकर अपनी जान बचायी।कचहरी की सारी व्यवस्था अस्तव्यस्त हो गयी। फायरिंग की आवाज़ सुनकर विभिन्न काम से कचेरी आया पुलिस बल भी तेजी से मौके पर आ गया । उक्त घटना मे रविन्द्र उर्फ भूरा व उसका भतीजा गौरव पुत्र मदन निवासी ग्राम वलीद पुर  थाना दौराला  जनपद मेरठ तथा अज्ञात हमलावर बदमाश मौके पर मारे गये । मृतक गौरव एवं मारे गये बदमाश के पास से एक-एक  पिस्टल मय मैगजीन जिनसे एक एक जिन्दा कारतूस भी मिले। घटना की सूचना पर आस के थानो का पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। मृतकों को पोस्टमार्टम हाउस व  घायलो को इलाज़ हेतू भर्ती कराया।

ये वज़ह रही अभियुक्तों के बर्री होने की।

(1) बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट अज्ञात में लिखाई गयी है। अभियुक्तगण के नामों का उल्लेख सर्वप्रथम ड्राईवर कॉन्स्टेबल करन सिंह के बयान में दिखाया गया है। शिनाख्त की कोई कार्यवाही नहीं करायी गयी है। घटना न्यायालय परिसर जैसे भीड़ भाड़ वाले स्थान की है। अभियोजन ने साक्षी प्रशान्त, विनय व सोहनवीर के अतिरिक्त जितने साक्षी पेश किये हैं वे सभी पुलिस के कर्मचारी अथवा अधिकारी हैं। अभियोजन ने स्वतंत्र साक्षियों को परीक्षित नहीं कराया है। पुलिस द्वारा कुछ अभियुक्तों को गिरफतार कर उनके द्वारा दिये गये बयान के आधार पर अन्य अभियुक्त यशवीर व गुलाब की संलिप्तता घटना में बताई है। अभियुक्तगण के गाँव के धर्मेन्द्र पुत्र सतपाल ने अपने भाई नीरज उर्फ घापा जो एक बदमाश था, की हत्या के सम्बन्ध में गाँव की पार्टीबाजी के कारण झूठा मुकदमा लिखाया हुआ था। 

(2)  बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के द्वारा तर्क देते हुए कहा गया है कि अभियुक्तगण का प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामित नहीं हैं तथा उनका हुलिया भी नहीं लिखा है। कोई शिनाख्त कार्यवाही नहीं करायी गयी है। साक्षी पी.डब्लू. 12 करन सिंह ने अभियुक्तगण को पहचानने से इन्कार किया। इस प्रकार शिनाख्त कार्यवाही के अभाव में अभियोजन कथानक में कोई बल नही रहता ।
 (3) पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि अभियुक्त अजय मलिक से बरामद पिस्टल जिसे घटना दिनांकित 16.10.2006 में प्रयुक्त किया जाना फर्द प्रदर्श क 48 में दिखाया गया है को विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया है।

(4) साक्षी पी.डब्लू. 24 ने स्पष्ट तौर पर यह कहा है कि अभियुक्त अजय मलिक से बरामद पिस्टल पर अभियुक्त के फिंगर प्रिन्ट के सम्बन्ध में कोई कार्यवाही नहीं की गयी थी। साथ ही साथ यह भी उल्लेखनीय है कि मृतकों के शरीर से निकाली गयी बुलेट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। अवलोकन से यह स्पष्ट है कि बुलटों के सम्बन्ध में आख्या अलग से अग्रेषण अधिकारी को अलग से प्रेषित किये जाने का संकेत किया गया है। इन बुलटों के सम्बन्ध में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की कोई परीक्षण आख्या अभियोजन द्वारा पत्रावली पर प्रस्तुत नहीं की गयी है। परीक्षण आख्या को पत्रावली पर प्रस्तुत न किये जाने का कोई संतोषजनक उत्तर अभियोजन की ओर से प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिससे अभियोजन कथानक में संदेह की स्थिति इस बात को लेकर उत्पन्न होती है कि फायरिंग में हमलावरों की गोली से ही कॉन्स्टेबल मनोज व गौरव की हत्या हुई न की पुलिस की गोली से।

गवाह : अभियोजन पक्ष की और से 27 गवाह पेश किए गए

 अधिवकता । वरिष्ठ अधिवक्ता व जिला बार के पूर्व अध्यक्ष श्री वी की शर्मा,संजीव कुमार व कुलदीप दत्त शर्मा रहे।

न्यायालय का निर्णय 

अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या 02 श्री ओमवीर सिंह द्वितिय ने कल दिनाँक 09/02/2024 को निर्णय दिया ।

माननीय उच्चतम न्यायालय के उक्त दृष्टान्तों में अभिनिर्धारित किये गये सिद्धान्त के परिप्रेक्ष्य में भी अभियोजन साक्षीगण के उक्त बयान की विवेचना किया गया और पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्य की विवेचना किया गया, तो इन गवाहों के बयान से अभियोजन कथानक सभी सन्देहों से परे युक्तियुक्त ढंग से साबित नहीं हो पा रहा है। उपरोक्त विवेचना से यह स्पष्ट हो चुका है कि अभियोजन पक्ष से परीक्षित कराये गये साक्षीगण अपने-अपने बयानों में घोर विरोधाभासी व अविश्वसनीय बयान दिये हैं, जिससे अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं होता है। अतः पत्रावली पर अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिलेखीय साक्ष्य एवं मौखिक साक्ष्य से यह स्पष्ट होता है कि अभियोजन पक्ष अपने कथानक को युक्तियुक्त संदेह से परे अभियुक्त के विरूद्ध प्रमाणित करने में पूर्णतः असफल रहा है तथा अभियुक्तगण आजाद, अजय मलिक, यशवीर व गुलाब लगाये गये आरोप धारा 147,148,149,302, 307,332,353,120बी. भा.द.सं. व धारा 7 क्रिमिनल लॉ अमेण्डमैन्ट एक्ट व अभियुक्त अजय मलिक धारा 25 आयुध अधिनियम तथा अभियुक्त अजय जडेजा लगाये गये आरोप धारा 302 व धारा 120 बी. भा.दं.सं. से दोषमुक्त किये जाने योग्य है।

Details below are from various news papers.

न्यायालय में कब कहा हुई हत्याएं

मुजफ्फरनगर कचहरी में हुआ विक्की हत्याकांड
यूपी के मुजफ्फरनगर में कोर्ट में 16 फरवरी 2015 को कुख्यात बदमाश विक्की त्यागी की हत्या कर दी गई थी. उसे उत्तराखंड की कोटद्वार जेल से पेशी पर मुजफ्फरनगर कचहरी लाया गया था. दोपहर 2.30 बजे वकील के वेश में एक हमलावर कोर्ट में घुसा और उसने पिस्टल से विक्की त्यागी पर 12 गोलियां चलाई. विक्की इस हमले में मारा गया. खुद विक्की त्यागी वेस्ट यूपी का शॉर्प शूटर था।उस पर लूट, कत्ल और रंगदारी के 25 केस दर्ज थे.

हापुड़ कोर्ट के बाहर कुख्यात बदमाश लाखन सिंह की हत्या

16 अगस्त 2022 को हरियाणा के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर लखनपाल को पेशी के लिए हापुड़ लाया गया था. हापुड़ की कचहरी के बाहर 4 बदमाशों ने 20 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग की. इसमें लखनपाल की मौत हो गई थी. मनोज भाटी और उसके साथी कचहरी में हत्याकांड को अंजाम देकर फरार हो गए थे। हालांकि बाद में मनोज भाटी पुलिस के साथ एक एनकाउंटर में मारा गया


संजीव माहेश्वरी की हत्या से हिला लखनऊ कोर्ट

लखनऊ कचहरी में दिनदहाड़े गोलियों से मारे गए संजीव माहेश्वरी को मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था । उसका नाम 10 फरवरी 1997 यूपी के पूर्व ऊर्जा मंत्री और बीजेपी नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी के हत्याकांड में आया था।इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जीवा को मारने वाले आरोपी की पहचान बिजनौर निवासी विजय यादव के तौर पर हुई है

मेरठ कोर्ट में हुई थी गैंगवार
16 अक्टूबर 2006 मेरठ की कचहरी में गैंगवार देखने को मिली था. फिल्मी अंदाज में हुई गैंगवार ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था. उत्तर प्रदेश के नामी कुख्यात रविंद्र सिंह भूरा और उसके भतीजे की कचहरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई . इसके अलावा पुलिस की गोली से बदमाश राजेंद्र उर्फ चुरमुट भी मारा गया था. .यूपी पुलिस का एक जवान भी इसमें मारा गया था. इस गैंगवार में कचहरी में आए 7 लोग घायल हो गए थे.
मुरादाबाद कचहरी में ब्लॉक प्रमुख की हत्या
24 फरवरी 2015 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के डिलारी के ब्लॉक प्रमुख की कचहरी में पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई थी. योगेंद्र उर्फ भूरा को 2 लोगों ने कचहरी में गोली मारी थी और उसके बाद वो फरार हो गए थे. योगेंद्र उर्फ भूरा भी वेस्ट यूपी में अपराध जगत का बड़ा नाम था. उनकी हत्या करने वालों में से एक की भाई की हत्या का आरोप योगेंद्र पर था. यानि बदले के लिए ये हत्या की गई थी.
बिजनौर कोर्ट में चली थी ताबड़तोड़ गोलियां
19 दिसंबर साल 2019 को यूपी के हिस्ट्रीशीटर बदमाश शाहनवाज की बिजनौर के कोर्ट में 11 गोलियां मार कर हत्या कर दी थी. वो एक केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल से पेशी के लिए बिजनौर कोर्ट पहुंचा था. पेशी के लिए शाहवनाज का भाई भी उसके साथ पहुंचा था लेकिन वो वारदात के दौरान फरार हो गया था. कोर्ट में हुए इस हमले से पूरे प्रदेश में सनसनी मच गई थी।


बिजनौर कोर्ट में चली थी ताबड़तोड़ गोलियां
19 दिसंबर साल 2019 को यूपी के हिस्ट्रीशीटर बदमाश शाहनवाज की बिजनौर के कोर्ट में 11 गोलियां मार कर हत्या कर दी थी।वो एक केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल से पेशी के लिए बिजनौर कोर्ट पहुंचा था।पेशी के लिए शाहवनाज का भाई भी उसके साथ पहुंचा था लेकिन वो वारदात के दौरान फरार हो गया था।कोर्ट में हुए इस हमले से पूरे प्रदेश में सनसनी मच गई थी।

8-गोरखपुर में रेप के आरोपी की हुई थी हत्या


गोरखपुर दीवानी कचहरी की पार्किंग में 21 जनवरी 2022 को रेप के एक आरोपी की हत्या कर दी गई थी।  दिलशाद हुसैन को रेप पीड़िता के पिता ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारी थी। उस पर हमला तब किया गया जब वो अपने वकील से मिलने के लिए दोपहर को कोर्ट पहुंचा।

UP बार कौंसिल की अध्यक्ष की हत्या
आगरा कचहरी में 12 जून 2019 को यूपी बार कौंसिल की अध्यक्ष चुनी गई दरवेश यादव को उनके ही एक पूर्व सहयोगी वकील ने अपनी लाइसेंस पिस्टल से 5 गोली मारी थी. उन पर ये हमला तब हुआ जब वो अपने चैंबर में बैठी थी। दरवेश यादव की हत्या करने बाद हमलावर वकील ने खुद को भी गोली मार दी थी।