चार घोड़ों वाले रथ पर सवार रावण का दहन करेंगे श्री राम

चार घोड़ों वाले रथ पर सवार रावण का दहन करेंगे श्री राम

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

चार घोड़ों वाले रथ पर सवार रावण का दहन करेंगे राम
-भैंसाली की रामलीला में आंखों से अंगारे बरसाएगा रावण
-आकर्षक बनाने के लिए रावण के सिरों को दिया गया नया रूप
मेरठ। भैंसाली की रामलीला को आकर्षक बनाने के लिए इस बार रावण को चार घोड़ों वाले रथ पर दिखाया जाएगा। भगवान श्रीराम रावण का वध करेंगे। रावण की आंखों से इस बार अंगारे बरसेंगे। इसके अलावा रावण के सिरों को भी नया रूप दिया जाएगा। इस तरह का प्रयोग उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी रामलीला में होने जा रहा है। रावण का पुतला बनाने में भी लाखों का खर्च कमेटी द्वारा किया जा रहा है।
जनपद में कई स्थानों पर श्रीराम लीला का मंचन होता है। सबसे महंगी रामलीला छावनी की होती है। हर साल इस रामलीला में टेक्रोलॉजी का सहारा लिया जाता है। मंचन कर रहे कलाकारों को भी दिल्ली सहित बड़े राज्यों से बुलाया जाता है। 50 से अधिक कलाकार अलग-अलग भूमिकाओं में अपने पात्र को जीवंत कर देते हंै। भैंसाली की रामलीला देखने के लिए दूर-दूर से दर्शक आते हैं। इस बार भी रामलीला में नया प्रयोग किया गया है। हालांकि, इस तरह के प्रयोग दिल्ली, मुम्बई बड़े राज्यों में हो चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह बिल्कुल नया है। रावण के पुतले को चार घोड़े वाले रथ पर सवार दिखाया जाएगा। उसकी आंखों से अंगारे बरसेंगे। मेरठ के दर्शक उत्साहित होकर इस नजारे को देखने के लिए बेताब हैं। कमेटी की ओर से प्रयोग पर काम हो चुका है। कमेटी संचालकों ने बताया कि लगभग 90 लाख रुपये का खर्च रावण के पुतले और उसके रथ पर हो रहा है।
तीर आपस में टकराएंगे तो निकलेगी आग
श्रीराम लीला कमेटी मेरठ छावनी के मीडिया प्रभारी निशांक गर्ग ने बताया, विजय दशमी (दशहरा) वाले दिन राम और रावण का युद्ध होगा, तो ऐसा न सिर्फ जमीन पर बल्कि हवा में भी होगा। इसके लिए खास तैयारी की जा रही है। दशहरा के दिन जो राम-रावण युद्ध होगा, उसमें आप देखेंगे कि इन योद्धाओं के रथ हवा में उड़ेंगे। इसके अलावा उनके तीर आपस में टकराएंगे तो उसमें से भी आग निकलेगी। हम चाहते है कि रामलीला देखते वक्त हमारे दर्शकों को भगवान राम का साक्षात रूप दिखे। सिर्फ लीला में ही नहीं, बल्कि रावण के जलते पुतलों में भी नई तरह की टेक्रालॉजी नजर आएगी। 
पुतला बनाने में कभी आती थी 30 रुपये की लागत
मीडिया प्रभारी निशांक गर्ग ने बताया, साल 1981 में रावण सहित मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतले बनाने में 1500 रुपये का खर्च आता था, लेकिन महंगाई बढ़ने से खर्च लाखों पर पहुंच गया। इस बार 90 लाख रुपये से ऊपर का खर्च पुतले बनाने में आ रहा है, क्योंकि रावण को चार घोड़ों वाले रथ पर सवार दिखाया जाएगा। कारीगर उस्ताद जहूर खान 3 रुपये रोज की मजदूरी करता था। अब इन पुतलों को जहूर के शार्गिद असलम अपने तीन पुत्रों अकरम, वसीम और सलमान के साथ बना रहा है। इस बार रावण का पुतला 80 फीट का होगा। वहीं आतिशबाजी करने वाला यामिन भी 30 वर्ष पहले 5 हजार रुपये लिया करता था, लेकिन उसको भी अब डेढ़ लाख रुपये में तय किया गया है।