मेरठ पोक्सो कोर्ट संख्या ०3 ने नाबालिग से दुष्कर्म करने पर सुनाई 10 वर्ष की सज़ा

मेरठ पोक्सो कोर्ट संख्या ०3 ने नाबालिग से दुष्कर्म करने पर  सुनाई 10 वर्ष की सज़ा
Image credits goes to :- https://images.app.goo.gl/4UMubpnRGvuYrjyf8

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

मेरठ में नाबालिग से दुष्कर्म करने

पर न्यायालय ने सुनाई 10 वर्ष

की सज़ा व अर्थदण्ड का आदेश

मेरठ कचेहरी न्यूज़ ।

वादी सराफत पुत्र मल्के द्वारा थाना कंकरखोडा मेरठ पर रिर्पोट दर्ज करायी कि वह नूरनगर थाना लिसाड़ी गेट (मेरठ) का रहने वाला है और ढोल बजाने का काम करता है। वह अपने धंधे के चक्कर में करीब एक माह से खडौली में पैठ बाजार के पास वह अपनी पत्नी शहनाज और दो लड़के जिनमें एक पीडित व एक अन्य बेटे व दो बेटी के साथ रह रहा है। अब रमजान खत्म हो गया है, हम लोग अपने घर को जाने वाले ही थे आज दिनांक 9/7/2016 को समय करीब सुबह 8.00 बजे मेरे बेटे पीडित जिसकी उम्र करीब सात वर्ष है खेलते खेलते को एक लड़का पेड़ो के बाग की झाडियो मे ले गया मैने पूछा के कहां जा रहे हो तो बोला के खेल रहे है अभी आते है, जब समय अधिक हो गया तो मैं अपने बडे लडके के साथ अपने बेटे को देखने बाग की तरफ गया तो हमने देखा कि उसके लडके 'क' के साथ एक लड़का दुष्कर्म कर रहा था मेरा बेटा रो रहा था हम तीनो ने अपने बेटे के साथ दुष्कर्म कर रहे लडके को मौके पर ही पकड़ लिया उसका नाम पता पूछा गया तो उसने अपना नाम 'A पुत्र 'B' निवासी ग्राम धोलडी थाना जानी (मेरठ) बताया । पकडे गये व्यक्ति को वह परिजनों के साथ थाने लेकर आया वादी की तहरीर के आधार पर मुकदमा संख्या 500/2016  । जिसका पर अपचारी 'A' के विरूद्ध धारा 377 भारतीय दंड संहिता तथा धारा- 3/4 पोक्सो अधिनियम के अर्न्तगत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना की गयी। सम्पूर्ण विवेचना के उपरान्त अपचारी 'A' के विरूद्ध धारा-' 377 भारतीय दंड संहिता तथा धारा- 3/4 पोक्सो अधिनियम के अर्न्तगत आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया जिस पर न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान लिया गया।

उपरोक्त मुकदमे की सुनवाई करते हुवे अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल पॉस्को एक्ट न्यायाधीश यास्मीन अकबर ने अभियुक्त को IPC की धारा 377 व 5 M 6 पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दोषी मानते हुए सजा सुनाई।


पोक्सो वाद सं0-449 सन 2016, मु०अ०सं०-500/2016. राज्य बनाम 'A' थाना कंकर खेडा जिला मेरठ के प्रकरण मे अपचारी किशोर 'A' को आरोपित अपराध की धारा-3 भा०द०सं० सपठित धारा-06 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 10 (दस) वर्ष के कठोर कारावास की सजा एवं 10,000 /- रूपए (दस हजार रूपये) के अर्थदंड से दण्डित किया है, अर्थदण्ड अदा न करने की स्थिति ने दोषसिद्ध अपचारी 'A' (छ) माह अतिरिक्त कारावास की सजा भोगेगा।

(2) दोषसिद्ध अपचारी 'A' द्वारा अर्थदंड की धनराशि जमा किये जाने की दशा मे अर्थदंड की सम धनराशि अंकन 10000/- रूपये (दस हजार रूपये) पीड़ित को प्रतिकार के रूप में बतौर क्षतिपूर्ति प्रक की जायेगी।

(3) दोषसिद्ध अपचारी 'A' द्वारा उपरोक्त अपराध में कारागार एवं राजकीय संप्रेक्षण गृह में बितायी अवधि उसकी उपरोक्त सजा में समायोजित की जायेगी।

(4) दोषसिद्ध अपचारी 'A' का सजायाबी वारन्ट बनाकर जिला कारागार मेरठ अविलम्ब प्रेषित किया जाएगा ।

(5) लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण नियमावली 2020 के नियम 9 (2) एवं दं०प्र० सं० धारा-357 क की उपधारा (2) के अन्तर्गत पीड़ित यथोचित प्रतिकर प्राप्त करेगा, जिसको दिये जाने इस निर्णय की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ को प्रेषित की जाये।

(6) निर्णय एवं दण्ङादेश की प्रति निःशुल्क अविलम्ब दोषसिद्ध अपचारी को प्राप्त करायी जाए।

उपरोक्त मुकदमे में अभियोजन पक्ष से विशेष अभियोजन अधिकारी आकाश अग्रवाल  एडवोकेट ने अभियोजन की और से  कुल 07 गवाह पेश किए।