गर्भवती के लिए प्रदूषण खतरनाक, रहें सावधान : डा. ललित कुमार

गर्भवती के लिए प्रदूषण खतरनाक, रहें सावधान : डा. ललित कुमार

दी न्यूज एशिया समाचार सेवा 

गर्भवती के लिए प्रदूषण खतरनाकरहें सावधान : डा. ललित कुमार

बाहर जाने से बचेंमास्क लगाएंघर में प्रदूषण का प्रभाव न हो इसके लिए करें इंतजाम

 मेरठ।  मेरठ समेत दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 के ऊपर पहुंच गया हैजो बहुत ही खतरनाक स्तर है। ऐसे में आम-स्वस्थ लोगों को सांस की दिक्कतआंखों में जलनदिल में भारीपन की शिकायत हो रही है। यह परिस्थितियां गर्भवती और उनके गर्भस्थ शिशु के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती हैंइसलिए उन्हें बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है। 

  एनएचएम के नोडल अधिकारी डा कांति प्रसाद ने बताया कि  इस दौरान प्रदूषण का काफी खराब असर मां और होने वाले बच्चे पर पड़ सकता हैक्यों कि प्रदूषण एनीमिया को बढ़ाता है जो गर्भवती के लिए और भी खतरनाक साबित होता है। इसलिए हर गर्भवती को कोशिश करनी चाहिए कि वह प्रदूषण से बचे। प्रदूषण सांस, आंखों मे जलन,  ह्रदय सहित अन्य कई बीमारियों को पैदा करता है और उन्हें बढ़ाता है। उन्होंने बताया- प्रदूषण में तरल व ठोस रूप में कई विषैले तत्व मौजूद होते हैंजिससे यह हो सकती हैं। मां जब प्रदूषण युक्त वातावरण में सांस लेती है तो होने वाले शिशु को जन्म के साथ ही कार्डियोवस्कुलर रोग व सांस से जुड़ी समस्या सहित कई अन्य रोग हो सकते हैंक्योंकि गर्भस्थ शिशु मां के शरीर के माध्यम से ही ऑक्सीजन ग्रहण करता है। प्रदूषण गर्भावस्था में शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। शुद्ध वायु की कमी के कारण तनावडिप्रेशनचिड़चिड़ापन जैसी समस्या हो सकती हैं।

गर्भावस्था में प्रदूषण से होने वाले नुकसान

डा.  प्रसाद  ने बताया गर्भावस्था के दौरान महिला यदि प्रदूषित वातावरण में ज्यादा समय रहती हैतो तीसरी तिमाही में गर्भस्थ शिशु को ऑटिज्म होने का खतरा रहता है। ऑटिज्म एक तरह की न्यूरो-डेवलपमेंट डिसऑर्डर (मानसिक बीमारी) है। इसके अलावा प्रदूषण में ज्यादा समय बिताने से गर्भ गिरने की आशंका बढ़ भी जाती हैक्योंकि गर्भस्थ शिशु ठीक तरह से ऑक्सीजन ग्रहण नहीं कर पाता है। इसी कारण लो बर्थ वेटप्रीमैच्योर जन्म आदि का खतरा भी रहता है।

अस्थमा पीड़ित गर्भवती को ज्यादा खतरा

गर्भवती यदि अस्थमा से पीड़ित है तो उसे प्रदूषण से सांस लेने की दिक्कत के अलावा ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती हैजो आगे चलकर दिल किडनी व लिवर पर विपरीत असर डाल सकती है। ऐसी स्थित में गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

उन्होंने  बताया - वातावरण में पीएम 2.5 कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा बढ़ने से हवा प्रदूषित हो जाती है। यह कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ कब फेफड़ों तक पहुंच जाएंकुछ कहा नहीं जा सकता। टीबी रोगियों के लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ा सकती है। इसके साथ ही श्वसन और हृदय रोगियों के लिए भी बढ़ता प्रदूषण खतरनाक है।

ऐसे कर सकते हैं बचाव

यदि बाहर जाना ज्यादा जरूरी नहीं तो घर में ही रहें।

बाहर जाना ही पड़े तो मास्क लगाकर ही निकलेंमल्टी लेयर गीले कपड़े का मास्क लगायें ।

घर के अंदर की वायु को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए पौधे घर में लगाएं।

हवा साफ रखने के लिए घर में एयर प्यूरीफायर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

सुबह- शाम घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

सांस लेने में कठिनाई हो रही है या घबराहट हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

 विशेषज्ञों के अनुसार कितना होना चाहिए एक्यूआई

0-50 के बीच अच्छा

51 से 100 के बीच संतोषजनक

101 से 200 के बीच मध्यम

201 से 300 के बीच खराब

301 से 400 के बीच बहुत खराब

इससे ऊपर खतरनाक