दवाई की कीमतों पर नियंत्रण के लिए लागत से दोगुने से अधिक मूल्य पर दवाई न बिकने दी जाए

दवाई की कीमतों पर नियंत्रण के लिए लागत से दोगुने से अधिक मूल्य पर दवाई न बिकने दी जाए

दी न्यूज एशिया समाचार सेवा |

दवाई की कीमतों पर नियंत्रण के लिए लागत से दोगुने से अधिक मूल्य पर दवाई न बिकने दी जाए

 मेरठ।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरी तरह समर्थन करते हैं जिन्होंने आम जन के हित में दवा की कीमतों को कम करने के लिए जन औषधि को माध्यम बनाया परंतु इस अच्छे विचार की काट निकालकर भ्रष्टाचार को खुले रूप में औजार बनाकर रोगी परिवारों की जेब काटने की आतुरता जिन लोगों ने दिखाई है, उनका विरोध है। 

होलसेल एवं रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ नेता व कैमिस्ट संगठन के पूर्व राष्ट्रीय सचिव तथा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने दवाई को संवेदनशील वस्तु बताते हुए कहा कि दवा मजबूरी में किया गया खर्च है और ऐसे में ₹10 की दवा को 100 रुपए में बिके तो यह लूट के साथ-साथ सामाजिक पाप भी है। दवा व्यापारी संगठन के प्रतिनिधि खुले मंच से बार-बार घोषणा कर रहे हैं कि  ₹10 में बेचने के बाद भी कंपनी मुनाफा कमा रही हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए कहा कि कुछ चिकित्सक  साधारण सी कंपनियों से अपने स्वयं के लिए सस्ती दवाई बनवाकर अपने क्लीनिक या नर्सिंग होम में चल रहे मेडिकल स्टोर में रख लेते हैं।पर्चे पर यही दवाईयां लिखी जाती हैं जो खुले बाजार में अन्यत्र नहीं मिल पाती। तब मरीज डॉक्टर के स्टोर से ही दवा खरीदने को मजबूर हो जाता है। पहले दवा कंपनियां मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के माध्यम से अपनी दवाई का प्रचार डॉक्टर के सम्मुख करती थी और डॉक्टर उनकी गुणवत्ता को अपने कुछ मरीजों पर जांच कर उन्हें प्रिसक्राइब करता था। परंतु अब व्यापार सीधे-सीधे हो रहा है।दवाई खरीदने के लिए दोबारा उसी डॉक्टर के स्टोर पर जाना होता है। यह रोगी के उपचार में सामाजिक व्यवस्था की बहुत बड़ी विडंबना है।

संगठन के महासचिव घनश्याम मित्तल ने जीएसटी विभाग का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा ₹10 की दवा खरीद कर, ₹10 पर राजस्व देकर उसे ₹100 में बेचे जाने पर ₹90 की राशि पर राजस्व की सीधी हानि होती है। दवा की दुकान पर ₹10 में खरीदी गई दवा को ₹12 में बेचा जाता है तो राजस्व 12 रुपए पर दिया जाता है। इस विषय पर राज्य सरकार का ध्यान पहले भी आकर्षित किया है। यदि किसी संगठन या डॉक्टर के प्रतिनिधि यह कहते हैं कि ऐसा नहीं किया जा रहा तो हमारा सीधा सा सुझाव है कि ऐसे डॉक्टर से जुड़े हुए मेडिकल स्टोर पर दवा की खरीद और विक्रय मूल्य का ऑडिट करवा दीजिए, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। 

संगठन के अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह ने  कहा कि सभी डॉक्टर बेईमान है ऐसा नहीं है हम आज भी उन  डॉक्टरों की प्रशंसा करेंगे जिन्होंने अपने क्लीनिक पर कोई मेडिकल स्टोर नहीं चला कर डॉक्टर के पवित्र पैशे के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया हुआ है। ऐसे डॉक्टर समाज के लिए विशेष सम्मान के अधिकारी हैं और जनता उनके प्रति आदर भाव सदैव रखेगी। ऐसे चिकित्सक भी हैं जो किसी भी दवा कंपनी के किसी भी प्रकार के प्रलोभन से मुक्त हैं और रोगी को अपनी समझ से बिना लोभ के दवा प्रिसक्राइब करते हैं। उन्होंने आज तक ना किसी दवा कंपनी से कोई मांग की,  ना वाहन लिया  या क्लीनिक बनवाने या मरम्मत करने,कोई विदेश यात्रा को स्पॉन्सर करने के लिए नहीं कहा।

दवा कंपनियां जिसमें भारत के बहुत बड़े-बड़े ब्रांड भी शामिल हैं 40-50% तक फ्री गुड्स दे सकती हैं तो क्यों न सरकार सभी दवा कंपनियों को निर्देशित करें कि लागत और बिक्री के बीच में मुनाफे की बहुत बड़ी खाई को,जो जनता के लिए अभिशाप है, संकरा कर दिया जाए।

 प्रेस वार्ता में राजेश अग्रवाल, देवेंद्र भसीन, मोहिद्दीन गुड्डू, गगन गुप्ता, विकास मित्तल , राम अवतार तोमर ,अरुण शर्मा ,कविराज मलिक संजय मलिक ,प्रवीण दुआ, नीरज तोमर , सौरभ जैन, कमल शर्मा , विवेक बंसल ,अरुण त्यागी, राहुल जैन आदि उपस्थित रहे।