मुजफ्फरनगर में 337 बीघा भूमि से हटेगा अवैध कब्जा, कोर्ट ने दिए ये आदेश

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मुजफ्फरनगर में 337 बीघा भूमि से हटेगा अवैध कब्जा, कोर्ट ने दिए ये आदेश

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

शुक्रवार को क्षेत्र के गांव गंदराऊ में मुस्तकीम व शौकीन पक्ष के बीच काठा नदी की भूमि पर अवैध कब्जा किये जाने की शिकायत करने को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। दोनों पक्षों के लोग हाथों में लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से लैस होकर एक-दूसरे पर टूट पड़े।

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने गंगनहर किनारे सिंचाई विभाग की 337 बीघा भूमि के अवैध कब्जे पर चले आ रहे स्टे आदेश को खारिज कर दिया। अवैध कब्जा हटने से सिंचाई विभाग की करोड़ो की भूमि पर प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट प्लांट लगने का रास्ता साफ हो गया है। यह भूमि जानसठ क्षेत्र के निरगाजनी के आसपास स्थित गंग नहर किनारे की है। जिसे 1950 में राज्यपाल के आदेश के बाद 6 वर्ष के पट्‌टे पर दिया गया था। लेकिन पट्‌टा खारिज होने के बावजूद उक्त भूमि पर वर्षो से अवैध कब्जा चला आ रहा था।

डीजीसी सिविल गौरव कुमार तथा एडीजीसी सिविल रविदत्त ने बताया कि 1950 में राज्यपाल के आदेश पर सिंचाई विभाग की 337 भूमि का पट्‌टा 6 वर्ष के लिए सूरत सिंह आदि के नाम पर छोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि पट्‌टे का नवीनीकरण 1973 तक हेाता रहा। लेकिन 1973 के बाद पट्‌टे का नवीनीकरण नहीं हुआ। बावजूद 2004-05 तक उसका लगान दिया जाता रहा। 2010 में सिंचाई विभाग ने अपनी भूमि खाली करा ली। उन्होंने बताया कि उसके बाद सूरत सिंह आदि ने सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट से भूमि पर स्टे ले लिया। स्टे आदेश में यथास्थिति बनाकर रखने तथा भमि की भौतिक स्थित में किसी भी प्रकार का संशोधन न करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया।

डीजीसी सिविल गौरव कुमार तथा एडीजीसी सिविल रविदत्त ने बताया कि स्टे आदेश के विरुद्ध सिंचाई विभाग ने अपीलीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए अपील योजित की। जिस पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 13 के जज शक्ति सिंह ने सुनवाई की। उन्होने बताया कि एडीजे 13 शक्ति सिंह ने मामले पर दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद सिविल कोर्ट का दिया गया स्टे खारिज कर दिया। जिससे गंग नहर किनारे सिंचाई विभाग की 337 बीघा भूमि से अवैध कब्जा हटने का रास्ता साफ हो गया।

डीजीसी सिविल गौरव कुमार तथा एडीजीसी सिविल रविदत्त ने बताया कि सिंचाई विभाग की 337 भूमि पर प्रदेश शासन ने पावर प्लांट लगाने की महत्वकांक्षी योजना शुरू करने के संकेत दिये थे। उक्त भूमि को पावर प्लांट लगाने के लिए चिन्हित किया गया था। लेकिन स्टे के चलते भूमि से अवैध कब्जा न हट पाने के कारण सरकार की उक्त महत्वकांक्षी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही थी। उन्होंने बताया कि कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अब उक्त भूमि पर पावर प्लांट लगने का रास्ता साफ हो गया।