जश्ने ईद  के नाम से सपा के हाजी आदिल चौधरी ने कराया मुशायरे का आयोजन

जश्ने ईद  के नाम से सपा के हाजी आदिल चौधरी  ने  कराया मुशायरे का आयोजन

दी न्यूज़ एशिया समाचार सेवा।

हम खयाल फाउंडेशन के जेरे एहतमाम एक मुशायरा जश्ने ईद  के नाम से बामुकाम  हाजी आदिल चौधरी लिसाड़ी गेट पर आयोजित की गई जिसके सरपरस्त हाजीआदिल चौधरी महानगर अधक्ष समाजवाजी पार्टी और मुख्य अतिथि जनाब डॉक्टर बसीर अहमद साहब रहे ।
शमा रोशन जनाब भानु प्रताप  सीनियर एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने की साहब ने की और ।संचालन शायर इरशाद बेताब एडवोकेट  ने किया ।
डॉक्टर युनुस ने पढ़ा की 
सच बोलने के जुर्म में लगता है ये मुझे ।
सानों  से सर भी जायेगा मेरी जुबां के बाद ।।
 शायर जनाब वसीम जहांगीराबादी ने पढ़ा की 
जुर्म उल्फत की मुझे खूब सजा दे गई है ।
मेरे रोने पे भी पाबंदी लगा दी गई है ।।
दानिश गजल ने  कुछ यूं पढ़ा की
मुझको मरना है इक जालिम के हाथों।
कहानी में यही किरदार हूं मैं ।।।

और 
पढ़कर महफिल में रंग भर दिया ।

संयोजक और मशहूर शायर  इरशाद बेताब ने  कहा कि -
होंठो पे कहकहे हैं गुफ्तो शनीद हैं।
लगये, लगाईये, गले यारो ! के ईद है ।
मुझको तो छोड़ दीजे, कि उसके बिना मेरी।
इस ईद में भी उसकी तमन्नाये दीद है ।।

पढ़ा तो श्रोता  वाह वाह करने आगे ।।
सदारत फरमा रहे डॉक्टर खालिद आज़मी साहब ने यूं पढ़ा की 
ग़ज़ल कहते हैं
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हुस्न और इश्क़ के बंधन को ग़ज़ल कहते हैं
ऑख के दर्द के  सावन  को  ग़ज़ल कहते हैं
रिज़्क़  का  अपने  वसीला  है हथौड़ा छेनी 
हम तो मज़दूर हैं आहन को ग़ज़ल कहते हैंऔर

डॉक्टर साबिर अजराडवी, गुफरान रशीद गुलाओठी, आदि शायरों ने अपना कलाम पढ़ा और श्रोताओं की खूब दाद हासिल की ।

मांगेराम त्यागी स्याना, जीशान खान , शकील सैफी , अफाक  अहमद खान , इमरान सरपंच , हाजी इसरार सैफी  , आफाक अहमद , इमरान सिद्दीकी , 
अब्दुल जब्बार एडवोकेट ,  एडवोकेट , आफताब आलम खां आदि उपस्थित रहे ।