आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का आयुष चिकित्सा पद्धतियों से समन्वय

आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का आयुष चिकित्सा पद्धतियों से समन्वय

दी न्यूज एशिया समाचार सेवा 

सुभारती वैलनेस सेन्टर द्वारा हुआ संगोष्ठी का आयोजन

आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का आयुष चिकित्सा पद्धतियों से समन्वय

 मेरठ। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का आयुष चिकित्सा पद्धतियों से समन्वय हेतु स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के वैलनेस  सेन्टर द्वारा  सत्यजीत रे प्रेक्षागृह में “इंटीग्रेटिड मल्टी - डिसिप्लिनरी एप्रोच फोर होलिस्टिक हैल्थ एंड वैलनेस“ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद सुभारती विवि  के कुलपति मेजर जनरल डॉ. जी. के. थपलियाल, वैलनेस सेन्टर के चेयरमैन एवं कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ.राहुल बंसल, विख्यात आयुर्वेदाचार्य  डॉ. आलोक शर्मा, महर्षि अरविन्दो सुभारती कॉलिज ऑफ नेचुरोपैथी एवं यौगिक साइंस के प्राचार्य डॉ. अभय एम. शंकरगौडा, भारत सरकार के यूनानी चिकित्सा के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सैयद अहमद खान,  सेन्टर काउंसिल फोर रिसर्च इन सिद्धा की रिसर्च  ऑफिसर  डॉ बी. अकीला, होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेरवा सिरपा लेह के सहायक प्रोफेसर एवं तिब्बती चिकित्सा  विशेषज्ञ डॉ. रिगजिन  समानला ने दीप  प्रज्वलित कर किया।

 कुलपति मेजर जनरल डॉ जी. के. थपलियाल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली एवं आयुष चिकित्सा पद्धतियां एक-दूसरे की पूरक हैं। यह समन्वय का समय है। उन्होंने कहा कि रोगी की चिकित्सा करने के लिए किसी भी पद्धति से रोग का निदान किया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा  प्रणाली में शीघ्रता पूर्वक रोगों के लक्षणों को दूर करने का प्रयास किया जाता है तथा आधुनिक संसाधनों और जांच के माध्यम से रोग के निदान का प्रयत्न किया जाता है। किन्तु आधुनिक चिकित्सा  प्रणाली में रोग को जड़ से समाप्त करने पर बल नहीं दिया जाता है।उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों में आपस में समन्वय होगा और इससे आमजन को लाभ मिलेगा।

 कार्यक्रम के आयोजक एवं वैलनेस सेन्टर के चेयरमैन व कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राहुल बंसल ने बताया कि इस संगोष्ठी में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और आयुष पद्धति द्वारा गैर संक्रमण बीमारियों मधुमेह, दमा, सांस रोगों व माइग्रेन जैसी बीमारियों पर चर्चा की। उन्होंने विभिन्न शोध के उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली एवं आयुष चिकित्सा पद्धतियां एक-दूसरे की पूरक हैं।इस अवसर कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के परास्नातक डॉ. अमनदीप कौर, डॉ. अंशुल कुमार, डॉ. गोपी रमन, डॉ. मार्टिस लवी, डॉ. निक्षित अरोड़ा सहित सभी मेडिकल डेन्टल नर्सिंग फिजियोथेरेपी, फार्मेसी, पैरामेडिकल कालिज के प्राचार्य डीन, शिक्षक ,परानताक  छात्र छात्राएं, इन्टरन्स आदि उपस्थित रहे।फैशन टैक्सटाइल एवं इंटीरियर डिजाइन की विभागाध्यक्ष डॉ नेहा सिंह ने मंच का संचालन किया। सुश्री सौम्या शर्मा, सुश्री अभिलाषा गर्ग, गोविंद,  श्रुति सोनी, परिणिति महापात्रा, नीतीश कुमार तिवारी ने सहयोग दिया।